Lilori dham dhanbad jharkhand | लिलोरी स्थान - एक रहस्यमय
दोस्तों आज हम एक आर्टिकल के बारे में बताने जा रहे ह जो की झारखण्ड की सबसे प्रसिद और काफी पुरानी तीर्थ स्थल है जो की 800 साल पुरानी है | यह मंदिर कतरास में है जो की धनबाद रेलवे स्टेशन से 22 किलो मीटर दूर है | यह मंदिर काफी ज्यादा पोपुलर है | इस मंदिर में लोग शादी करवाने के लिए पहले से ही लाइन में लगना पद जाता है तब जा के नंबर मिलता है |
आगे में जानेंगे की आखिर यह मंदिर इनता पोपुलर क्यों है और सबसे पहले इस मंदिर में किसने पूजा करी थी |
दोस्तों अगर आप सभी को इस मंदिर के बारे में पूरी तरह से जानना है तो जरूर इस लेख को अंत तक पढ़े |
लिलोरी स्थान कहाँ स्तिथ है |
माँ लिलोरी स्थान की एतिहासिक स्थान |
यह मंदिर धनबाद के राजा सुजन सिंह ने माता की प्रतिमा को 800 वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश के रीवा के राजघराने के वंशज की मदद से कतरास के इस घने जंगल में माता की प्रतिमा को स्थापित किया था | उस समय यह स्थान काफी घनघोर जंगल हुआ करता था | इस जंगल में हाथी तेंदुवा, बाघ , बंदर और साप भी पाया जाता था | इस जंगले में कई तरह के विशेले जानवर पाए जाते थे | क्युकी उस ज़माने में यहाँ काफी जंगले हुवा करता था |
माँ लिलोरी स्थान राजा सृजन सिंह के कुलदेवी के रूप में पूजा अर्चना करने लगे थे | और तब से आज तक इस मंदिर में सबसे पहले राजा के घर से ही कोई सबसे पहले पूजा करते है |
मान्यता
माँ लिलोरी स्थान पोपुअर क्यों है |
लिलोरी स्थान में क्या चढ़ावा होता है
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